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असंतुष्ट जीव

 संतुष्ट सुअर बनने से बेहतर है असंतुष्ट मनुष्य बनना ... संतुष्ट मनुष्य बनने से बेहतर है असंतुष्ट सुक़रात बनना  ..जेम्स मिल  Ankit Kumar Yadav 

संघर्ष

  -   सितंबर 21, 2021 सुनो योद्धा....  तुम इस आधुनिक समाज की गति मान व्यवस्था मे इस प्रकार उलझ चुके हो कि तुम अपनी सोंचने, समझने और अपने दिमाग की छमताओ को पूर्ण रूप से भूल गए हो*****इस सामाजिक व्यवस्था ने तुम्हारे दिमाग की सोंचने की शक्ति को सीमित कर दिया है*****तभी तुम स्कूल या कालेज मे मात्र कुछ numbers कम होने पर हार मान लेते हो***** सोंचने का विषय है.........जो जन्म लेने से पहले ही करोडो़ं की दौड़ मे अकेला जीता था.......करोड़ों को मात देकर जन्म लिया ... और वही योद्धा इस दुनिया मे मात्र हज़ारों, लाखों की दौड़ से हार मान लेता है***** तुम्हें सबसे पहले इस जाल को समझना होगा जिसमे तुम फंसे हुए हो जिसके कारण तुम खुद पर, अपनी काबिलियत पर संदेह करने लगते हो*****और ये तुम्हारा खुद पर किया गया संदेह तुम्हारे आत्मबल को और अधिक कमजोर कर देता है*****और जब तुम इससे बाहर निकल जाओगे तब तुम्हारे सामने कितना ही मुश्किल परिस्थितियां क्यों न आ जाये, तब तुम अपनी मजबूर सोंच के साथ उसका सामना करोगे..... ।।  बस तुम्हे खुद को पहचानने की देर है......  "हताश मत हो, निराश मत हो, अभी तो...